आध्यात्मिक ज्ञान मे आज आपदेखे कि प्रभु का नाम जपने से भव सागर पार हो सकता है इस लेख को पूरा पढने के लिये नीचेदीगई लिक पर क्लिक करे-डा०-दिनेशकुमार शर्मा चीफ एडीटर एम.बी.न्यूज-24💐💐💐💐💐💐

आध्यात्मिक ज्ञान मे आज आप देखे प्रभु केनाम जप की महिमा-
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*वृंदावन की एक गोपी जो कि रोज दूध दही बेचने मथुरा जाती थी,एक दिन व्रज में एक संत आये, जो कि जगह जगह प्रभु के नाम जप की महिमा के गुणगान की कथा सुनाते थे। तो एक दिन एक गोपी भी वहां पर कथा सुनने गई,*।

*संत उस कथा में कह रहे थे, भगवान के नाम की बड़ी महिमा है, उनके नाम जपने से बड़े बड़े संकट भी टल जाते है, भगवान का नाम तो भव सागर से तारने वाला है,*
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*यदि भव सागर से पार होना है तो भगवान का नाम कभी मत छोडना.*
उसके बाद
*कथा समाप्त हुई तो गोपी अगले दिन फिर दूध दही बेचने चली, तो बीच रास्ते में यमुना जी थी.।तो उस समय उस गोपी को संत के द्वारा कही गई बात याद आई, संत ने कहा था भगवान का नाम तो भवसागर से पार लगाने वाला है,*
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*जिस भगवान का नाम भवसागर से पार लगा सकता है तो क्या उन्ही भगवान का नाम मुझे इस साधारण सी नदी से पार नहीं लगा सकता ।

*ऐसा सोचकर गोपी ने अपने मन में भगवान के नाम का आश्रय लिया और भोली भाली गोपी यमुना जी की ओर आगे बढ़ती गई, अब जैसे ही उस गोपी ने यमुना जी में पैर रखा तो उसे लगा कि मानो वह जमीन पर चल रही है और ऐसे ही वह सारी यमुना नदी को पार कर गई,*।

*यमुना नदी को पार कर दूसरी तरफ पहुँचकर उसे बड़ी प्रसन्नता हुई, और अपने मन में सोचने लगी कि संत ने तो हमे ये तो बड़ा अच्छा तरीका बताया इस पार से उस पार जाने का, अव उस गोपी ने अपने मन मे विचार किया कि अव तो मुझे रोज-रोज नाविक को भी पैसे नहीं देने पड़ेगे.*।

*एक दिन गोपी ने अपने मन मे सोचा कि संत ने मेरा इतना भला किया है तो मुझे उन्हें खाने पर बुलाना चाहिये, अगले दिन गोपी जब दही बेचने गई, तब उन संत से अपने घर में भोजन करने को कहा तो वे संत तैयार हो गए,* और उस गोपी के साथ साथ चल दिये।
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*अब बीच में फिर यमुना नदी आई संत नाविक को बुलाने लगे तो गोपी बोली बाबा नाविक को क्यों बुला रहे हो. हम तो ऐसे ही यमुना जी में चलेगे.*
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*संत बोले – अरे गोपी तुम कैसी बात करती हो, यमुना जी को हम ऐसे ही कैसे पार करेगे ?*
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*गोपी बोली – बाबा ! आप ने ही तो रास्ता बताया था, आपने कथा में कहा था कि भगवान के नाम का आश्रय लेकर प्राणी भवसागर से पार हो सकते है.*

*तो मैंने सोचा कि जब भव सागर से प्राणी पार हो सकते है तो यमुना जी से पार क्यों नहीं हो सकते ?और मै ऐसा ही करने लगी, इसलिए मुझे अब नाव की जरुरत नहीं पड़ती.*।

उन संत को उस गोपी की बात पर विश्वास नहीं हुआ और बोले – हे गोपी तू ही पहले आगे चल ! मै तुम्हारे पीछे पीछे आता हूँ,*
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*गोपी ने भगवान के नाम का आश्रय लिया और जिस प्रकार रोज जाती थी वैसे ही यमुना जी को पार कर गई.*
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*अब जैसे ही संत ने यमुना जी में पैर रखा तो झपाक से पानी में गिर गए, संत को बड़ा आश्चर्य, हुआ ।
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*अब गोपी ने जब देखा कि संत महात्मा तो पानी में गिर गए है तब गोपी लौटकर पुनः वापस आई और उन संत महात्मा का हाथ पकड़कर जब चली तो संत भी गोपी की भांति ही ऐसे चले जैसे जमीन पर चल रहे हो जव सँत यमुना नदी से बाहर निकलकर आये तोउस गोपी के चरणों में गिर पड़े, और बोले – कि हे गोपी तू धन्य है !*.
*वास्तव में तो सही अर्थो में नाम का आश्रय तो तुमने ही लिया है और मै तो जिसने नाम की महिमा बताई तो सही पर स्वयं नाम का आश्रय नहीं लिया..*
*सच मे भक्त मित्रो हम भगवान नाम का जप एंव आश्रय तो लेते है पर भगवान नाम मे पूर्ण विश्वाव एंव श्रद्धा नही होने से हम इसका पूर्ण लाभ प्राप्त नही कर पाते..*

* हमारे शास्त्र बताते है कि भगवान श्री कृष्ण का एक नाम इतने पापो को मिटा सकता है जितना कि एक पापी व्यक्ति कभी कर भी नही सकता. है ।

*अतएव भगवान नाम पे पूर्ण श्रद्धा एंव विश्वास रखकर ह्रदय के अंतकरण से भाव विह्वल होकर जैसे एक छोटा बालक अपनी माँ के लिए बिलखता है ..उसी भाव से सदैव नाम प्रभु का सुमिरन एंव जप करे*

*कलियुग केवल नाम अधारा !*
*सुमिर सुमिर नर उतरहि ही पारा!!*

*श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे! हे नाथ नारायण वासुदेवाय!
*।।जय जय श्री राम।।*
।।जय जयश्री कृष्ण।।

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