
एक अजगर व एक चिडिया व उसके दो बच्चों की कहानी-
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एक जंगल में बहुत से चन्दन के पेड़ थे। उन्हीं मे से एक पेड़ पर एक अजगर रहता था।अजगर को चन्दन के पेड़ की महक बहुत पसंद थी।
एक दिन अजगर पेड़ से लिपट कर सो रहा था। उसी पेड़ के उपर की टहनी पर एक चिड़िया ने अपना घोंसला बना रखा था।
चिड़िया के दो छोटे बच्चे थे। चिड़िया अपने बच्चों को खाना खिला रही थी। तभी उसके बच्चों के चहचहाने की आवाज से अजगर की आंख खुल गई। उसने चिड़िया से कहा – ‘‘अरे चुप करा इन बच्चों को, चैन से सोने भी नहीं देते।’’
चिड़िया बोली – ‘‘अजगर भाई सोने के लिये तो रात बनाई गई है। दिन में सोने से अच्छा है, आप जाकर कोई काम करो।’’
यह सुनकर अजगर कहने लगा – ‘‘तूने कभी अजगर को काम करते देखा है। हम तो ऐसे ही पड़े रहते हैं। कोई शिकार फस गया तो उससे हमारे दस दिन का भोजन हो जाता है।’’
यह सुनकर चिड़िया को थोड़ा सा डर लगा – ‘‘भाई तुम कहीं मुझे और मेरे बच्चों को खाने की तो नहीं सोच रहे हो?’’
अजगर यह सुनकर हसने लगा उसने कहा – ‘‘अरे तुम्हें खाने से मेरा क्या पेट भरेगा। वैसे भी मैं इतने छोटे जानवर का शिकार नहीं करता।’’
धीरे धीरे समय बीत रहा था। कई दिनों से अजगर को कोई शिकार नहीं मिला।
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अजगर बहुत भूखा था। इधर चिड़िया हर दिन अपने बच्चों के लिये दाना चुगने जाती और लाकर अपने बच्चों को खिलाती। उसके बच्चे बहुत खुश होते थे। एक दिन जब चिड़िया दाना लेने जा रही थी। तभी अजगर ने सोचा आज क्यों न इसके दोंनो बच्चों को खा जाउं। इससे एक तो मेरा कुछ पेट भर जायेगा। दूसरे ये दोंनो सारा दिन शोर मचाते रहते हैं। मैं उससे भी बच जाउंगा।
अजगर धीरे धीरे पेड़ की उंची डाली की ओर बढ़ने लगा। उसे उन बच्चों पर तरस भी आ रहा था, लेकिन उसे भूख भी बहुत तेज लग रही थी।
दोंनो बच्चों ने जब अजगर को अपनी ओर आते देखा तो वे सर्तक हो गये। अजगर जब सोता था। तब चिड़िया ने अपने दोंनो बच्चों को सिखा दिया था, कि यह आलसी अजगर कभी भोजन न मिलने पर तुम्हें खाने का प्रयास कर सकता है। इसलिये तुम दोंनो को उड़ना आना चाहिये।
दोंनो बच्चों बस मौका ढूंढ रहे थे। अजगर जैसे उनकी और लपका। दोंनो बच्चे उड़ कर दूसरे पेड़ पर बैठ गये। सही पकड़ न होने के कारण अजगर नीचे गिर गया। उसे काफी चोट लगी थी। वह ढंग से हिल भी नहीं पा रहा था।
वहीं पास ही में चिड़िया का घोंसला गिर कर बिखर गया था।
कुछ देर में चिड़िया दाना लेकर आई। उसने घोंसला टूटा हुआ देखा तो वह समझी उसके बच्चों को अजगर खा गया। घोंसला भी नीचे पड़ा है। अजगर बच्चों को खाकर आराम से सो रहा है। ऐसा सोच कर वह उसके उपर जाकर बैठ गई और पीठ में चोंच मारने लगी।
अजगर बेहोश पड़ा था। तभी चिड़िया के बच्चों ने अपनी मां को देखा और वो जोर जोर से चिल्लाने लगे। उन्हें देख कर चिड़िया बहुत खुश हुई। वह उड़ कर उस डाल पर बैठ गई। लेकिन अब उनका घोंसला टूट चुका था।
तभी अजगर को होश आ गया। वह अपने किये पर पछता रहा था। अजगर बोला – ‘‘बहन मुझे माफ कर दो मैं कई दिन से भूखा था। जब भूख बर्दाशत नहीं हुुई तो तुम्हारे बच्चों को खाने का विचार मन में आया। मुझे माफ कर दो और वापस इसी पेड़ पर आ जाओ।’’
चिड़िया ने कहा – ‘‘नहीं अब मैं वहां नहीं आ सकती। अब मुझे तुम्हारा भरोसा नहीं है। कहीं फिर से तुम्हारा मन बदल गया तो क्या होगा। यह तो मेरे बच्चे जाग रहे थे, अगर रात में तुम इनके पास आते तो ये बेचारे सोते हुए ही तुम्हारा भोजन बन जाते।’’
अजगर ने बहुत कोशिश की लेकिन चिड़िया अब उसके झांसे में नहीं आई। उसने दूसरे उंचे पेड़ पर अपना घोंसला बना लिया। वह पेड़ नदी के दूसरे किनारे पर था जहां अजगर पहुंच नहीं सकता था।
इधर अजगर कुछ ही दिन में भूख से मर गया। अजगर के मरते ही शिकारियों को पता लग गया। वे उन चन्दन के पेड़ों को काट कर ले गये।
दूसरों का बुरा सोचने वालों का हमेशा खुद बुरा हो जाता है।


