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*ब्रेकिंग न्यूज़ / पशुपालन विभाग*
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*योगी सरकार में 5 अक्टूबर से बंद है 1962 पशु सेवा एंबुलेंस, गांव-गांव में पशुपालक हो रहे परेशान फोन मिलाने पर फोन नही मिलता*
*लखनऊ/हाथरस।* उत्तर प्रदेश में पशुओं के लिए चलाई जा रही सबसे बड़ी आपातकालीन सेवा *1962 पशु सेवा एंबुलेंस* पिछले *5 अक्टूबर से पूरी तरह बंद* पड़ी है। इससे प्रदेश के लाखों पशुपालकों को अपने बीमार गौवंश और अन्य पशुओं के इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
*क्या है पूरा मामला -*
> *1.* यह सेवा सरकार द्वारा *मार्च 2023 से लगभग पूरे उत्तर प्रदेश में टेंडर बेस पर* चलाई जा रही थी।
> *2.* जिस कंपनी को 2023 में टेंडर मिला था, अब उन सभी कंपनियों का टेंडर खत्म कर दिया गया है।
> *3.* सूत्रों के अनुसार किसी नई कंपनी को टेंडर देने की तैयारी है, लेकिन नई कंपनी में कर्मचारियों का वेतन पिछली कंपनियों की अपेक्षा बढ़ने के बजाय और *कम करने का आदेश* मिला है।
> *4.* इसी विवाद के चलते *5 अक्टूबर से सेवा पूरी तरह बंद है*, जिससे हर गांव में पशुपालक परेशान हैं।
> *5.* समय पर उपचार न मिलने से पशुओं की हालत बिगड़ रही है।
पशुपालकों का कहना है – *”गौ माता सहित सभी पशुओं का जीवन भी कीमती है, टोल फ्री नंबर 1962 पर कॉल करने पर कोई जवाब नहीं मिल रहा।”*
*कर्मचारियों की मांग*
1962 पशु सेवा एंबुलेंस के समस्त कर्मचारीगण ने सरकार से निवेदन किया है कि –
> *”मेरा सरकार से निवेदन है कि यह 1962 पशु सेवा एंबुलेंस पशुपालन विभाग द्वारा ही चलाई जाए, किसी प्राइवेट टेंडर कंपनी को न दी जाए। यह गंभीर विषय है और पशुपालकों की आवाज अनसुनी नहीं की जानी चाहिए।”*
*प्रार्थी: 1962 पशु सेवा एंबुलेंस समस्त कर्मचारीगण

